‘ज्ञान भारतम’ पहल से छत्तीसगढ़ की धरोहर को राष्ट्रीय पहचान: कोलर के दुर्लभ ताड़ पत्र पुराण संरक्षक दलवत देहारी सम्मानित

नारायणपुर, छत्तीसगढ़

May 17, 2026 - 17:28
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‘ज्ञान भारतम’ पहल से छत्तीसगढ़ की धरोहर को राष्ट्रीय पहचान: कोलर के दुर्लभ ताड़ पत्र पुराण संरक्षक दलवत देहारी सम्मानित

नारायणपुर, 16 मई 2026 

भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ‘ज्ञान भारतम’ पहल के अंतर्गत गत 16 मार्च 2026 को देशभर में पांडुलिपियों की पहचान एवं दस्तावेजीकरण हेतु ‘ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण’ संपन्न हुआ। इस राष्ट्रीय अभियान का मूल उद्देश्य भारत की प्राचीन पांडुलिपियों का व्यवस्थित मानचित्रण कर उनके संरक्षण, गहन अनुसंधान एवं डिजिटलीकरण के लिए सुदृढ़ आधारशिला तैयार करना है।

इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के ग्राम कोलर में एक स्वतंत्रता सेनानी परिवार द्वारा पीढ़ियों से संरक्षित दुर्लभ ताड़ पत्र पुराणों ने राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान अर्जित की है। ये प्राचीन पांडुलिपियां प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एवं मौखिक-लिखित ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर के रूप में चिह्नित की गई हैं।

इन ग्रंथों के संरक्षण में अविस्मरणीय योगदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानी स्व. श्री चिंतु देहारी के पौत्र श्री दलवत देहारी को आज 16 मई 2026 को जिला कार्यालय के सभा कक्ष में गरिमामय समारोह में सम्मानित किया गया। कलेक्टर सुश्री नम्रता जैन के मार्गदर्शन में अपर कलेक्टर श्री बीरेंद्र बहादुर पंचभाई ने शाल एवं श्रीफल भेंट कर श्री दलवत देहारी का अभिनंदन किया।

संरक्षित प्रमुख ताड़ पत्र पुराणों में *नामरत्न गीता, देवी भागवत, काँगा बोली, लक्ष्मी पुराण, कृपा सिंधु तथा पांजी संगनेठी भागवत पुराण* सम्मिलित हैं। इन ग्रंथों में धार्मिक आख्यानों के साथ-साथ तत्कालीन सामाजिक संरचना, सांस्कृतिक मूल्यों और स्थानीय भाषाई वैविध्य का जीवंत चित्रण भी उपलब्ध है।

पुरातत्वविदों एवं इतिहास विशेषज्ञों के अनुसार इन पांडुलिपियों का वैज्ञानिक संरक्षण एवं अध्ययन छत्तीसगढ़ के गौरवशाली अतीत, आदिवासी समाज की बौद्धिक परंपरा तथा स्थानीय ज्ञान प्रणाली को समझने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगा। यह पहल प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय पटल पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। 

इस अवसर पर राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।