कॉफी बोर्ड और जिला प्रशासन ने अबूझमाड़ के कुतुल क्षेत्र में तलाशी कॉफी की नई संभावनाएं

नारायणपुर, छत्तीसगढ़

Jul 5, 2026 - 17:35
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कॉफी बोर्ड और जिला प्रशासन ने अबूझमाड़ के कुतुल क्षेत्र में तलाशी कॉफी की नई संभावनाएं

नारायणपुर, 05 जुलाई 2026 अबूझमाड़ के वन क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण एवं किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा कॉफी की खेती प्रारंभ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में कलेक्टर नम्रता जैन ने भारत सरकार के कॉफी बोर्ड के विशेषज्ञों के साथ कुतुल, कच्चापाल, कोडलियार, ईरकभट्टी और तोके सहित आस पास में ग्रामों का भ्रमण कर कॉफी उत्पादन की संभावनाओं का विस्तृत स्थल निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञ दल ने क्षेत्र की जलवायु, वार्षिक वर्षा, तापमान, मिट्टी की प्रकृति, समुद्र तल से ऊंचाई एवं अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों का गहन अध्ययन किया। कॉफी बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि अबूझमाड़ का प्राकृतिक वातावरण कॉफी की खेती के लिए अत्यंत अनुकूल है तथा यहां कॉफी आधारित कृषि वानिकी मॉडल विकसित कर बड़े पैमाने पर आजीविका के अवसर सृजित किए जा सकते हैं।

कॉफी बोर्ड के विशेषज्ञों ने जानकारी दी कि कॉफी पौधों से लगभग चार वर्षों के रखरखाव के बाद उत्पादन प्राप्त होना शुरू हो जाता है, जिसके पश्चात यह लंबे समय तक ग्रामीणों के लिए नियमित आय का स्रोत बन सकता है। इस परियोजना में स्व-सहायता समूहों और स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि प्रत्येक परिवार का कम से कम एक सदस्य इससे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार एवं आय अर्जित कर सके।

कलेक्टर नम्रता जैन ने कहा कि जिले में कॉफी की खेती प्रारंभ करने का उद्देश्य ग्रामीणों को आय का नया और स्थायी माध्यम उपलब्ध कराना, जंगलों के संरक्षण को बढ़ावा देना तथा अबूझमाड़ के अनुकूल प्राकृतिक वातावरण का बेहतर उपयोग करना है। उन्होंने कहा कि कॉफी आधारित कृषि मॉडल से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और स्थानीय समुदाय की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

          प्रारंभिक चरण में भूमि का चयन कर कॉफी प्लांटेशन की शुरुआत की जा रही है तथा इसके लिए स्थानीय स्तर पर नर्सरी स्थापित करने की भी योजना है। कॉफी बोर्ड के अधिकारियों ने जिले को हर संभव तकनीकी सहयोग, मार्गदर्शन एवं नियमित पर्यवेक्षण उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

कॉफी बोर्ड के अधिकारियों ने सुझाव दिया कि जिले के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाए, जिससे वे कॉफी उत्पादन की तकनीकी जानकारी प्राप्त कर सकें। इस पर कलेक्टर ने अधिकारियों को ओडिशा के कोरापुट स्थित कॉफी क्षेत्रों में प्रशिक्षण हेतु भेजने की बात कही। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें कॉफी उत्पादन, पौध प्रबंधन, पर्यावरणीय आवश्यकताओं, जलवायु अनुकूलन एवं अन्य तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी जाएगी, ताकि वे जिले में किसानों एवं स्व-सहायता समूहों को बेहतर मार्गदर्शन प्रदान कर सकें।

निरीक्षण के दौरान यह भी चर्चा हुई कि अबूझमाड़ का वातावरण चाय की खेती के लिए भी काफी उपयुक्त है। इस पर कलेक्टर ने भविष्य में चाय उत्पादन की संभावनाओं पर भी अध्ययन कर चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

                इस दौरान भारत सरकार कॉफ़ी बोर्ड से श्री एच. आर. मुरलीधर, उप निदेशक (एक्सटेंशन) आंध्र प्रदेश, श्री सुनील बाबू, प्रभारी अधिकारी, क्षेत्रीय कॉफी अनुसंधान केंद्र, आंध्र प्रदेश, श्री बिस्वरंजन भोई, वरिष्ठ संपर्क अधिकारी, कोरापुट (ओडिशा) साथ ही उप संचालक कृषि श्रीमती मोनिका ठाकुर, कार्यपालन अभियंता जल संसाधन विभाग श्री अशोक चौधरी सहित संबंधित अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।