नारायणपुर: मंडी नीलामी में 44 लाख का रिकॉर्ड, प्रक्रिया पर उठे सवाल

नारायणपुर, छत्तीसगढ़

Aug 20, 2026 - 08:59
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नारायणपुर: मंडी नीलामी में 44 लाख का रिकॉर्ड, प्रक्रिया पर उठे सवाल

नारायणपुर-जिला कृषि उपज मंडी समिति, नारायणपुर ने 19 अगस्त 2026 को बखरूपारा स्थित नवनिर्मित मंडी कॉम्प्लेक्स की नीलामी कराई। इस नीलामी में जिले में अब तक की सबसे बड़ी बोली 44.00 लाख रुपये की लगी।

नीलामी से कितना राजस्व मिला

मंडी समिति द्वारा जारी सूची के अनुसार कुल 08 दुकान/शेड नीलाम हुए।

1. पुराना मंडी प्रांगण, बखरूपारा - 06 दुकान

यहां से विभाग को सबसे ज्यादा आय हुई।  

1. दुकान क्र. 08 - श्री अखिलानंद जायसवाल - 44.00 लाख

2. दुकान क्र. 16 - श्री मिथेश दीवान - 36.50 लाख

3. दुकान क्र. 09 - श्री सताष कुमार गुप्ता - 36.00 लाख

4. दुकान क्र. 10 - श्री यशवंत साना - 34.20 लाख

5. दुकान क्र. 14 - श्री नरेन्द्र जैन - 32.50 लाख

6. दुकान क्र. 15 - श्री अजय जैन - 32.00 लाख  

_इन 6 दुकानों से कुल आय: 2 करोड़ 15 लाख 20 हजार रुपये_

2. मुख्य मंडी प्रांगण, साहका रोड - 02 शेड

1. शेड क्र. 28 - श्री मन्नूराम कोठारे - 14.70 लाख  

2. शेड क्र. 31 - श्री मो. इसरान खान - 13.00 लाख

विभागीय जानकारी के अनुसार बखरूपारा कॉम्प्लेक्स को बनाने में लगभग 45 से 50 लाख रुपये खर्च हुए थे।

आरक्षित कॉम्प्लेक्स का आबंटन कैसे हुआ-

दस्तावेज के अनुसार आरक्षित श्रेणी में कुल 03 कॉम्प्लेक्स थे। इनका आबंटन "पहले आओ पहले पाओ" नियम के तहत किया गयाl

- पटेल/मरार समाज के लिए: 2 कॉम्प्लेक्स

- *एग्री बिजनेस / गौ उत्पाद के लिए*: 2 कॉम्प्लेक्स

*आवेदकों ने क्या सवाल उठाए*

नीलामी के बाद कुछ आवेदकों ने आरक्षित आबंटन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। 

आवेदकों का कहना है कि:  

1. आवेदन लेते समय GEO TAG यानी स्थान की फोटो नहीं ली गई।

2. आवेदन रजिस्टर में समय और दिनांक नहीं लिखी गई। 

3. आवेदकों से हस्ताक्षर भी नहीं कराए गए।  

आवेदकों की मांग है कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता रखी जाए।

विभाग का पक्ष -

अभी यह साफ नहीं है कि प्रक्रिया में जो कमियां बताई जा रही हैं, उसकी जानकारी विभाग को पहले से थी या यह कर्मचारियों की लापरवाही के कारण हुई। मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई है।

इस संबंध में मंडी समिति के सचिव से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनका पक्ष नहीं मिल सका। विभाग का पक्ष मिलने पर खबर में जोड़ा जाएगा।

फिलहाल रिकॉर्ड राजस्व के साथ-साथ आबंटन प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के कारण यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।