मौत से जीती मासूम – 9000 प्लेटलेट्स और सेरेब्रल मलेरिया के बीच जिला अस्पताल नारायणपुर के डॉक्टरों ने लौटाई मुस्कान
नारायणपुर, छत्तीसगढ़
नारायणपुर जिला चिकित्सालय नारायणपुर में चिकित्सकों की त्वरित सूझबूझ, समय पर उपचार और लगातार गहन चिकित्सा से सेरेब्रल मलेरिया से पीड़ित एक मासूम बच्ची को नया जीवन मिला है। अस्पताल लाए जाने के समय बच्ची बेहोशी की अवस्था में थी। जांच में उसके प्लेटलेट्स मात्र 9000 पाए गए। जबकि सामान्य स्थिति में प्लेटलेट्स की संख्या 1.50 लाख से 4.50 लाख के बीच होती है। उसकी हालत अत्यंत गंभीर थी और जीवन पर संकट मंडरा रहा था।
मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए सिविल सर्जन एवं अस्पताल अधीक्षक डॉ. विनोद भोयर और उनकी टीम ने बिना समय गंवाए तत्काल उपचार शुरू किया। रात में ही फ्रेश ब्लड की व्यवस्था कर बच्ची को ब्लड ट्रांसफ्यूजन दिया गया। इस पुनीत कार्य में बखरूपारा निवासी निहाल तिवारी ने रक्तदान कर मानवता की मिसाल पेश की। सेरेब्रल मलेरिया के उपचार के लिए तुरंत क्यूनिन इंजेक्शन प्रारंभ किया गया और बच्ची को आईसीयू में भर्ती कर लगातार निगरानी में रखा गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में आवश्यक दवाइयों और गहन चिकित्सा के माध्यम से उपचार जारी रखा गया।
लगातार उपचार और समर्पित देखरेख के परिणामस्वरूप बच्ची की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ी, होश वापस आया और कुछ दिनों के अथक प्रयासों के बाद बच्ची पूरी तरह खतरे से बाहर आ गई।
इस सफल उपचार में डॉ. विनोद भोयर के नेतृत्व में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. दिलीप सिन्हा, डॉ. आदित्य केवट, डॉ. मोनिका मीना सहित आईसीयू स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पूरी टीम ने रातभर सतत निगरानी कर समय पर उपचार उपलब्ध कराया, जिससे मरीज की जान बचाने में सफलता मिली।
इस अवसर पर डॉ. विनोद भोयर ने बताया कि सेरेब्रल मलेरिया एक जानलेवा बीमारी है, लेकिन समय पर पहचान, शीघ्र उपचार और उचित गहन चिकित्सा से मरीज की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने आमजन से अपील की कि तेज बुखार, ठंड के साथ सिर दर्द जैसे लक्षण दिखाई देने पर बिना विलंब नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या जिला चिकित्सालय में पहुंचकर जांच एवं उपचार अवश्य कराएं।
जिला चिकित्सालय नारायणपुर की चिकित्सकीय टीम की दक्षता, समर्पण और मरीजों के प्रति प्रतिबद्धता का यह प्रकरण एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इससे एक बार फिर यह सिद्ध हुआ है कि सही समय पर लिए गए निर्णय, टीमवर्क और उचित उपचार से गंभीर से गंभीर मरीज को भी नया जीवन दिया जा सकता है।





