बंगलापारा में बालवाड़ी के नन्हे बच्चों ने मनाया पोला तिहार, मिट्टी के बैलों की पूजा कर जाना कृषि संस्कृति का महत्व
नारायणपुर, छत्तीसगढ़
नारायणपुर शासकीय प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला बंगलापारा में संचालित बालवाड़ी एवं आंगनबाड़ी केंद्र में आज छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोकपर्व पोला तिहार बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर प्रधान पाठक श्रीमती ब्रजेश्वरी रावटे ने बच्चों को पोला पर्व के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि पोला तिहार मुख्य रूप से कृषि, पशुधन और अन्नदाता किसानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। यह छत्तीसगढ़ का प्रमुख पारंपरिक लोकपर्व है, जो हर साल भाद्रपद मास की अमावस्या को मनाया जाता है।
कार्यक्रम में शिक्षिका श्रीमती विजयलक्ष्मी गुर्जर ने कहा कि इस दिन किसान अपने बैलों को सजाकर उनकी पूजा करते हैं। साथ ही बाजार से लाए गए मिट्टी के बैल, मिट्टी के खिलौने और बर्तनों की पूजा की जाती है। इस परंपरा के अनुसार आज बालवाड़ी में भी बच्चों से मिट्टी के बैलों और खिलौनों की पूजा कराई गई। गांवों में बच्चे इन मिट्टी के खिलौनों से खेलते हैं, यह छत्तीसगढ़ की अनोखी परंपरा है जो हमें प्रकृति और किसान के प्रति धन्यवाद देना सिखाती है, इसलिए हम प्रतिवर्ष बालवाड़ी में बच्चों के साथ यह तिहार मनाते हैं।
इस दौरान बच्चों में काफी उत्साह देखा गया। नन्हे-मुन्ने बच्चों ने मिट्टी के बैलों के साथ खेलते हुए इस कृषि पर्व को समझा।
इस अवसर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता चैतमणी नंदी, लखेश्वरी यादव, लक्ष्मी यादव, अमरबती यादव, संगीता ठाकुर सहित समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में बच्चे उपस्थित थे।





