सुशासन का दावा और जमीनी हकीकत में फर्क: नारायणपुर में "सुशासन एक्सप्रेस" गैराज में, ग्रामीणों तक नहीं पहुंच रही योजनाएं

नारायणपुर, छत्तीसगढ़

Aug 7, 2026 - 13:34
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सुशासन का दावा और जमीनी हकीकत में फर्क: नारायणपुर में "सुशासन एक्सप्रेस" गैराज में, ग्रामीणों तक नहीं पहुंच रही योजनाएं

नारायणपुर, 07 अगस्त 2026छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सुशासन को बढ़ावा देने और शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से "सुशासन तिहार" और "सुशासन एक्सप्रेस" जैसी महत्वाकांक्षी पहलें संचालित की जा रही हैं। राज्य स्तर पर इन अभियानों के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं कि सुशासन एक्सप्रेस के माध्यम से अधिकारी गांव-गांव पहुंचकर समस्याएं सुन रहे हैं और मौके पर समाधान कर रहे हैं।

लेकिन नारायणपुर जिले में इस महत्वाकांक्षी योजना की स्थिति जिला प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गई है। सुशासन एक्सप्रेस के नाम पर जिले को आवंटित सफेद रंग की बोलेरो गाड़ियां, जिन पर "सुशासन एक्सप्रेस" स्पष्ट लिखा हुआ है, आज नारायणपुर कार्यालय परिसर के एक शेड में खड़ी धूल फांक रही हैं। हमारे संवाददाता को प्राप्त तस्वीरों में गाड़ियों के नंबर CG 21F 5627 और CG 21F 8777 साफ देखे जा सकते हैं। गाड़ियों पर जमी धूल इस बात का प्रमाण है कि लंबे समय से ये मैदान में नहीं उतरी हैं।

स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराते हुए कहा है कि सुशासन एक्सप्रेस को विशेष रूप से अबूझमाड़ सहित जिले के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित गांवों के लिए शुरू किया गया था। इसका मूल उद्देश्य था कि अधिकारी स्वयं गांवों तक पहुंचें, स्वास्थ्य, शिक्षा, राशन, पेंशन और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दें तथा ग्रामीणों की समस्याएं मौके पर सुनकर उनका त्वरित निराकरण करें।

लेकिन पिछले कई महीनों से इन गाड़ियों के नहीं चलने के कारण इस योजना का लाभ जमीनी स्तर पर नहीं पहुंच पा रहा है। इसका सीधा असर जिले के दूरस्थ क्षेत्रों के ग्रामीणों पर पड़ा है, जो आज भी मूलभूत सुविधाओं और सरकारी योजनाओं की जानकारी से वंचित हैं।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से सवाल किया है कि जब शासन सुशासन और जनसेवा को प्राथमिकता दे रहा है, तो नारायणपुर जैसे संवेदनशील जिले में सुशासन एक्सप्रेस के पहिए क्यों थमे हुए हैं। लाखों रुपये की लागत से खरीदी गई इन गाड़ियों का यदि समुचित उपयोग नहीं होगा तो शासन की मंशा आम जनता तक कैसे पहुंचेगी।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सुशासन एक्सप्रेस को तत्काल पुनः सक्रिय किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया है कि इन गाड़ियों के लिए नियमित भ्रमण का शेड्यूल तय किया जाए और अधिकारियों की टीम को दूरस्थ गांवों में भेजकर योजनाओं का प्रचार-प्रसार एवं शिकायत निवारण सुनिश्चित किया जाए।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो सुशासन के नाम पर चल रहा यह अभियान केवल कागजों और नारों तक सीमित रह जाएगा और शासन की मंशा पूरी नहीं हो पाएगी।

फिलहाल इस संबंध में जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।