जिला नारायणपुर में सुरक्षा बलों के लगातार प्रयासों के फलस्वरूप 5 माओवादियों ने किये आत्मसमर्पण
नारायणपुर,छत्तीसगढ़ जिला नारायणपुर के कुतुल एवं इन्द्रावती एरिया कमेटी अन्तर्गत सक्रिय थे आत्मसमर्पित माओवादी।
जिला नारायणपुर में सुरक्षा बलों के लगातार प्रयासों के फलस्वरूप 5 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें जोनल डॉक्टर डिप्टी कमाण्डर एवं एलओएस सदस्य सहित 5 माओवादी शामिल हैं। आत्मसमर्पित माओवादियों ने समाज की मुख्य धारा में जुड़ने की शपथ ली है।
आत्मसमर्पित माओवादियों के नाम और पद:
1. दसरी ध्रुव पिता पंडरू उम्र 26 वर्ष निवासी कोंगे थाना सोनपुर जिला नारायणपुर (छ.ग.) पद- जोन डॉक्टर टीम डिप्टी कमाण्डर, ईनामी 2 लाख
2. छन्नू गोटा पिता स्व. ढेलू गोटा उम्र 28 वर्ष निवासी ग्राम चालचेर थाना ओरछा जिला नारायणपुर (छ.ग.) पद- नेलनार एलओएस सदस्य, ईनामी 1 लाख
3. ज्योति वड्डे उर्फ कुटके पिता केये उम्र 19 वर्ष निवासी ग्राम पदमकोट थाना कोहकामेटा जिला नारायणपुर (छ.ग.) पद- जनमिलिशिया सदस्य ईनामी 1 लाख
4. सीता वड्डे पिता चैतू वड्डे उम्र 19 वर्ष निवासी ग्राम नेडपार थाना ओरछा जिला नारायणपुर (छ.ग.) पद- इन्द्रावती एलओएस सदस्य, ईनामी 1 लाख
5. इरपे उर्फ सुनीता वड्डे पिता स्व. कोसा वड्डे उम्र 25 वर्ष निवासी ग्राम कुड़मेल थाना ओरछा जिला नारायणपुर (छ.ग.) पद- इन्द्रावती एलओएस सदस्य ईनामी 1 लाख
आत्मसमर्पण के कारण:
- संगठन के विचारों से मोहभंग एवं मिली निराशा
- संगठन के भीतर बढ़ते आंतरिक मतभेद
- छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल उन्मूलन नीति और पुनर्वास नीति का प्रभाव
- क्षेत्र में लगातार चलाये जा रहे विकास कार्य और सड़कों का निर्माण
- गावों तक पहुँचती विभिन्न सुविधाएं
आत्मसमर्पण के बाद की प्रक्रिया:
- आत्मसमर्पित माओवादियों को प्रोत्साहन राशि 50 हजार रुपये का चेक प्रदान किया गया
- उन्हें नक्सल उन्मूलन नीति के तहत मिलने वाली सभी प्रकार की सुविधाएं दिलाई जाएंगी
एसपी नारायणपुर का बयान:
- सरकार की पुनर्वास नीति के फायदे, घर, नौकरी ने आत्मसमर्पित माओवादियों को आकर्षित किया है
- आत्मसमर्पण माड़ एवं खुद की भलाई के लिए सोचा है, और ‘‘माड़ बचाओ अभियान” ने उन्हें अब एक नई आस दी है
- माओवादी की विचारधारा में भटके नक्सलियों को उनके घर वाले भी वापस लाना चाहते हैं
नारायणपुर पुलिस और सुरक्षा बलों की भूमिका:
- नारायणपुर पुलिस और आईटीबीपी, बीएसएफ की संयुक्त बल ने माओवादियों के विरूद्ध क्षेत्र में लगातार नक्सल विरोधी ‘‘माड़ बचाव’’ अभियान चलाये जा रहे हैं
- आत्मसमर्पण कराने में नाराणपुर पुलिस एवं आईटीबीपी, बीएसएफ का विशेष योगदान है





