अबूझमाड़ में विकास की नई शुरुआत: 246 गांवों को मिलेगा जमीन का कानूनी अधिकार, सरकारी योजनाओं से जुड़ेंगे आदिवासी परिवार
नारायणपुर , छत्तीसगढ़
वर्षों से नक्सल प्रभावित रहने के कारण बस्तर के अबूझमाड़ क्षेत्र मुख्यधारा से दूर था। इस क्षेत्र के 246 गांवों में आज तक भूमि का कोई सरकारी रिकॉर्ड नहीं बन पाया था। यहां के लोग पीढ़ियों से अपनी जमीन पर खेती करते आए हैं, लेकिन कागज पर अधिकार न होने के कारण उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता था।
अब इस ऐतिहासिक कमी को दूर करने के लिए प्रशासन ने अबूझमाड़ में राजस्व सर्वे अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ जमीन नापना नहीं है, बल्कि यहां रहने वाले आदिवासी परिवारों को उनका वैधानिक अधिकार दिलाकर उन्हें विकास से जोड़ना है।
अभियान के तहत अब तक 6 गांवों का सर्वे पूरा कर अंतिम अभिलेख तैयार कर लिए गए हैं। इन गांवों के रिकॉर्ड को डिजिटल पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है, ताकि जमीन से जुड़ी जानकारी पारदर्शी और सुरक्षित रहे। इसके साथ ही 8 अन्य गांवों में भी सर्वे का काम पूरा हो चुका है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद दुर्गम गांवों में सर्वे टीमों ने काम कर लिया है। सर्वे के बाद मिले आंकड़ों से नक्शे तैयार करवाए जा रहे हैं, ताकि जमीन की स्थिति और स्पष्ट हो सके।
जमीन का कानूनी अधिकार मिलने के बाद अबूझमाड़ के किसानों की स्थिति में बड़ा बदलाव आएगा। अब तक किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, धान खरीदी, बीमा और अन्य कृषि योजनाओं से वंचित रहने वाले परिवार अब सीधे इन योजनाओं से जुड़ सकेंगे। इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी, खेती को बढ़ावा मिलेगा और जमीन को लेकर होने वाले विवाद भी कम होंगे।
प्रशासन का लक्ष्य है कि सभी 246 गांवों में सर्वे का काम समय पर पूरा कर हर पात्र परिवार को भूमि का अधिकार दिया जाए। अधिकारियों का मानना है कि यह कदम अबूझमाड़ के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
अब कानून, कागज और पहचान के साथ अबूझमाड़ में विकास की एक नई कहानी लिखी जा रही है। जमीन का हक मिलने से न सिर्फ लोगों को सम्मान मिलेगा, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके घर तक पहुंचेगा।





