बस्तर राइजिंग का कारवां जिले के ग्राम गढ़बेंगाल में स्थापित घोटूल से शुरू

नारायणपुर, छत्तीसगढ़

Oct 9, 2025 - 22:24
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बस्तर राइजिंग का कारवां जिले के ग्राम गढ़बेंगाल में स्थापित घोटूल से शुरू

टीम ने पद्मश्री पांडीराम मंडावी के मार्गदर्शन में बने घोटूल का किया अवलोकन

कच्चापाल पहुंचकर आदिवासी कला और संस्कृति देख मंत्रमुग्ध हुए टीम के सदस्य

नारायणपुर, 09 अक्टूबर 2025 छत्तीसगढ़ शासन के जनसम्पर्क विभाग एवं बस्तर संभाग के तहत जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से “बस्तर राइजिंग” नामक विशेष अभियान की शुरुआत जिले के ग्राम गढ़बेंगाल से हुई। हिमाचल प्रदेश से आए नवाचारी दल ने आज जिला प्रशासन, वन विभाग और पद्मश्री पांडीराम मंडावी के सहयोग से निर्मित घोटूल का अवलोकन किया। यह घोटूल पूरी तरह इको-फ्रेंडली सामग्री — लकड़ी, मिट्टी और बांस — से तैयार किया गया है। खंभों पर की गई बारीक नक्काशी स्वयं पद्मश्री मंडावी द्वारा की गई है, जो इसकी भव्यता को और बढ़ाती है। टीम के सदस्यों ने इन कलाकृतियों को देखकर मुक्तकंठ से प्रशंसा की।

घोटूल परिसर में सगा कुरमा (बैठक कक्ष), उदना कुरमा (विश्राम कक्ष), बिडार कुरमा (सामग्री कक्ष) और लड़के-लड़कियों के लिए अलग-अलग कक्ष बनाए गए हैं। मुख्य द्वार की सुंदर नक्काशी इस सांस्कृतिक धरोहर को विशिष्ट आकर्षण प्रदान करती है। पूर्वकाल में घोटूल एक शैक्षणिक केंद्र के रूप में कार्य करता था, जबकि आज यह स्थान आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और पर्यटकों को आदिवासी संस्कृति से परिचित कराने का कार्य कर रहा है। चेंदुरू पार्क के समीप निर्मित यह घोटूल आदिवासी जीवनशैली और परंपरा को जीवंत रखने का प्रतीक है। इसके माध्यम से आदिवासी परंपरा और ज्ञान को सहेजने का कार्य किया जा रहा है, जिससे नई पीढ़ी इस गौरवशाली संस्कृति को निकट से देख और समझ सके।

‘बस्तर राइजिंग’ टीम का स्वागत घोटूल में पारंपरिक ककसार नृत्य से किया गया। इसके बाद टीम ने काष्ठ शिल्प सहित अन्य कलाओं के बारे में स्थानीय कलाकारों से जानकारी ली और उन्हें संरक्षित रखने के उपायों पर चर्चा की। टीम ने बांस शिल्प कला केंद्र नारायणपुर का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने बांस कला को देखा और उसकी प्रक्रिया को समझा।

इसके पश्चात टीम ग्राम पंचायत कच्चापाल पहुँची, जहाँ उनका स्वागत आदिवासी नृत्य के साथ किया गया। टीम ने आदिवासी कला और संस्कृति का आनंद लिया। घोटूल में पारंपरिक ढंग से उन्हें बैठाया गया और स्थानीय संस्कृति पर चर्चा की गई। तत्पश्चात उन्हें पारंपरिक आदिवासी भोजन परोसा गया, जिसकी टीम ने खूब प्रशंसा की। इस दौरान संस्कृति और परंपरा को सहेजने तथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने के विषय पर भी विचार-विमर्श किया गया।

उल्लेखनीय है कि “हार्मोनी फेस्ट 2025”के अंतर्गत बस्तर राइजिंग नामक यह बहुआयामी अभियान बस्तर संभाग की सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और उद्यमशीलता क्षमताओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने तथा पृथक पहचान दिलाने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया है। जनसम्पर्क विभाग द्वारा विशेषज्ञों, युवाओं, शिल्पकारों और स्थानीय समुदायों के बीच संवाद कार्यशालाएँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

"हार्मोनी फेस्ट 2025" का आयोजन आगामी 26 अक्टूबर को रायपुर में किया जाएगा, जिसमें बस्तर संभाग के कलाकार आमंत्रित किए गए हैं। “दिल मेला रू दिल में ला” थीम पर आधारित इस अभियान के अंतर्गत बस्तर की प्रेरक कहानियाँ, नवाचार और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। सात सदस्यीय दल में ‘प्लेसेज़ ऑफ पॉसिबिलिटीज़’ के संस्थापक प्रतुल जैन, परीना सिंघल, पलक चौधरी, आयुषी कपूर, निष्ठा जोशी, सदफ अंजुम और फ्रानो डिसिल्वा शामिल हैं।