नारायणपुर की लंबी लड़ाई रंग लाई: रावघाट खदान की DMF निधि का हिस्सा मिलेगा, खनिज साधन विभाग ने कांकेर को दिए अंतरण के निर्देश

नारायणपुर, छत्तीसगढ़

Apr 24, 2026 - 14:45
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नारायणपुर की लंबी लड़ाई रंग लाई: रावघाट खदान की DMF निधि का हिस्सा मिलेगा, खनिज साधन विभाग ने कांकेर को दिए अंतरण के निर्देश

नारायणपुर। खनन से प्रभावित गांवों की वर्षों पुरानी मांग आखिरकार पूरी हो गई है। छत्तीसगढ़ शासन के खनिज साधन विभाग ने रावघाट लौह अयस्क खदान से मिलने वाली जिला खनिज न्यास निधि का उचित हिस्सा अब नारायणपुर जिले को सौंपने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। 

विभाग ने 22 अप्रैल 2026 को पत्र क्रमांक LAND-44/111/2025-MRD जारी कर कलेक्टर कांकेर को स्पष्ट निर्देश दिए कि रावघाट परियोजना से जमा DMF राशि में से नारायणपुर जिले के प्रभावित क्षेत्रों का अंश तत्काल नारायणपुर DMF खाते में अंतरित किया जाए। इसमें वित्तीय वर्ष 2020-21 से अब तक की बकाया राशि के साथ भविष्य में आने वाली निधि का आनुपातिक वितरण भी शामिल होगा। 

यह निर्णय संचालक, भू-विज्ञान तथा खनिकर्म के पत्र क्रमांक 1199/DMF/GENCOR/11537/2025-DGM, दिनांक 09.04.2026 के आधार पर लिया गया। पत्र में कहा गया कि नारायणपुर जिले में DMF राशि का आंकलन कर प्रभावित क्षेत्र के अनुपात में अंतरण सुनिश्चित किया जाए।

*विवाद की जड़ क्या थी?*  

DMF नियम 2015 और प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के दिशा-निर्देशों के तहत खनन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्रों में ही निधि खर्च की जानी चाहिए। प्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्र वे गांव हैं जहां खुदाई, ब्लास्टिंग और परिवहन होता है, जबकि अप्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्र 25 किमी के दायरे में आने वाले वे इलाके हैं जहां जल, वायु, मिट्टी और आजीविका पर असर पड़ता है।

रावघाट लौह अयस्क खदान का भौतिक खनन क्षेत्र प्रशासनिक रूप से कांकेर जिले में दर्ज होने के कारण अब तक पूरी DMF राशि कांकेर के खाते में जा रही थी। जबकि हकीकत यह थी कि खनन से प्रभावित ज्यादातर गांव और बड़ी आबादी नारायणपुर जिले में आती है। नारायणपुर जिला पूर्व में बस्तर से अलग होकर बना है, लेकिन पूरी DMF निधि केवल कांकेर को मिलने से स्थानीय ग्रामीण और जनप्रतिनिधि लंबे समय से आपत्ति जता रहे थे।

ग्रामीणों का तर्क था कि खनन का असर नारायणपुर के लोग झेल रहे हैं, तो DMF पर उनका हक बनता है। राज्य शासन के हस्तक्षेप के बाद अब इस मांग को कानूनी मान्यता मिल गई है। 

इस निर्णय से नारायणपुर के प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, कौशल विकास और आजीविका से जुड़ी योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। ग्रामीणों ने इसे विकास के लिए संघर्ष की बड़ी जीत बताया है।