*बस्तर की लोक संस्कृति और इतिहास: एक अनोखा मिश्रण
नारायणपुर, छत्तीसगढ़ बस्तर में मनाया गया हर्ष उल्लास के साथ अक्ति का त्यौहार
बस्तर की जनजातियां अक्षय तृतीया के दिन अक्ति का त्यौहार मनाती हैं, जो प्रकृति के साथ गहरा जुड़ाव और आदिवासी समुदाय की समृद्ध परंपराओं को दर्शाता है।
*बस्तर की लोक संस्कृति और इतिहास*
बस्तर की लोक संस्कृति और इतिहास अपने आप में एक अनोखा मिश्रण है, जो प्रकृति के साथ गहरा जुड़ाव और आदिवासी समुदाय की समृद्ध परंपराओं को दर्शाता है। यहाँ के त्यौहार और अनुष्ठान प्रकृति की पूजा और धन्यवाद करने के बारे में हैं।
*अक्षय तृतीया या अक्ति: एक प्रमुख त्यौहार*
अक्षय तृतीया बस्तर का एक प्रमुख त्यौहार है, जो अक्षय और अमर होने के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस दिन, आदिवासी समुदाय के लोग वन देवता को भोग लगाते हैं और वनों की पूजा करते हैं।
*प्रकृति की पूजा*
अक्षय तृतीया के दिन, आदिवासी समुदाय के लोग प्राकृतिक माता की पूजा करते हैं और फल, अनाजों का भोग लगाते हैं। आम के पेड़ों में लडाकूचेदार आम और अन्य फलों का भोग लगाया जाता है।
*बस्तर की अनोखी संस्कृति*
बस्तर की अनोखी संस्कृति में आदिवासी समुदाय के लोग अपनी प्राकृतिक संपदा को थोड़ा-थोड़ा मात्रा में भोग लगाकर प्राकृतिक देवता को खुश करते हैं। यह त्यौहार वर्षभर हरियाली और हरे-भरे खेतों को सुहाने बनाने का एक सुहाना दिन होता है।
*आदिवासी समुदाय की परंपराएं*
बस्तर जिले के आदिवासी समुदाय के लोग अक्षय तृतीया को अति त्यौहार के रूप में मनाते हैं। इस दिन, गांव के हर परिवार रंग-बिरंगे वेशभूषाधारण कर वन देवता को भोग लगाने और वनों की पूजा करने के लिए
पूजा याचना करते हैं।





